कुछ पल चाहती हूँ तुमसे ...
तुम्हारी ज़िन्दगी से मेरी ज़िन्दगी के लिए कुछ लम्हे चाहती हूँ मैं
ज्यादा नहीं बस एक पल ...
जिसमे मुझे तुम्हे कुछ याद दिलाना है
वो सारे सपने जो तुमने बुने थे ...
वो सारी बाते जो तुमने बोयी थी मेरे आंगन में
जिन्हें कभी मुड़कर देखा ही नहीं तुमने ...
वो सपने आज बहोत बड़े हो गए है
वो बातें तो आज हकीकत बने है
वो एक पल चाहती हूँ जो तुमने मेरी ज़िन्दगी से छिना था बिना मेरी इज़ाजत के
वो एक पल मुझे चाहिए तुमसे ...
ज्यादा नहीं मांग रही हूँ बस एक पल चाहिए
जिसमे तुम्हे याद दिलाने है वो सारे वादे जो कभी तुमने किये थे मुझसे
एक पल चाहिए जो याद दिलाएगा तुम्हे तुम्हारी उस वफ़ा का जो कभी तुमने जफा में बदल दी थी
ज्यादा नहीं चाहिए तुमसे मुझे कुछ बस एक पल चाहिए ...
तुम्हारी ज़िन्दगी का ... तुम्हारी इज़ाजत से ... क्या दोगे मुझे वो एक पल ?
............................................................................................................................अवंती
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