Saturday, March 31, 2012

पल

कुछ  पल  चाहती  हूँ  तुमसे  ... 
तुम्हारी  ज़िन्दगी  से  मेरी  ज़िन्दगी  के  लिए  कुछ  लम्हे  चाहती  हूँ  मैं 

ज्यादा  नहीं  बस  एक  पल ...
जिसमे  मुझे  तुम्हे  कुछ  याद  दिलाना  है 

वो  सारे  सपने  जो  तुमने  बुने  थे  ...
वो   सारी बाते  जो  तुमने  बोयी थी  मेरे  आंगन  में 

जिन्हें  कभी  मुड़कर  देखा  ही  नहीं  तुमने  ... 
वो  सपने  आज  बहोत  बड़े  हो  गए  है 
वो  बातें  तो  आज  हकीकत  बने  है 

वो  एक  पल  चाहती  हूँ  जो  तुमने  मेरी  ज़िन्दगी  से  छिना  था  बिना  मेरी  इज़ाजत  के 
वो  एक  पल  मुझे  चाहिए  तुमसे ... 
ज्यादा  नहीं  मांग  रही  हूँ  बस  एक  पल  चाहिए 
जिसमे  तुम्हे  याद  दिलाने  है  वो  सारे  वादे  जो  कभी  तुमने  किये  थे  मुझसे 
एक  पल  चाहिए  जो  याद  दिलाएगा  तुम्हे  तुम्हारी  उस  वफ़ा  का  जो  कभी  तुमने  जफा  में  बदल  दी  थी 

ज्यादा  नहीं  चाहिए  तुमसे  मुझे  कुछ  बस  एक  पल  चाहिए ... 
तुम्हारी  ज़िन्दगी  का ... तुम्हारी  इज़ाजत  से ... क्या दोगे मुझे वो  एक  पल ?
............................................................................................................................अवंती



Thursday, March 29, 2012

साहिर की कलम से ...

जनाब गुरुदत्त साहब की  बेहतरीन फिल्मो में से एक फिल थी "प्यासा" जिसमे एक बडाही   ख़ूबसूरत गीत था   "जिन्हें  नाज़  है  हिंद  पर  वो  कहा  है " जिसे संगीत तो दिया था एस डी बर्मन ने और बडेही च्यांव से गया था मोहम्मद रफ़ी ने... लेकिन इस गीत के सफल होने का जो भी श्रेय है वो इसकी लिखावट में है।... वैसे देखा जाए तो साहिर लुधियानवी के लिखे सारेही गीत आपनेही आप में कुछ कह जाते है। ... 
जिन्हें नाज़ है हिंद पर .. ये गाना साहिर के ही तल्खियाँ में से "चकले" नज़्म का modified version है। वोही नज़्म ....

चकले..

ये कूचे ये नीलामघर दिलक़शी के
ये लुटते हुए कारवां ज़िंदगी के
कहां हैं कहां हैं मुहाफ़िज़ ख़ुदी के
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


ये पुरपेंच गलियां ये बेख़्वाब बाज़ार
ये गुमनाम राही ये सिक्कों की झंकार
ये इस्मत के सौदे ये सौदों पे तकरार
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


तअफ्फुन से पुरनीम रौशन ये गलियां
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियां
ये बिकती हुई खोखली रंगरलियां
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


वो उजले दरीचों में पायल की छनछन
तऩफ्फ़ुस की उलझन पे तबले की धनधन
ये बेरूह कमरों में खांसी की धनधन
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


ये गूंजे हुए कहकहे रास्तों पर
ये चारों तरफ भीड़ सी खिड़कियों पर
ये आवाज़ें खिंचते हुए आंचलों पर
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


ये फूलों के गजरे ये पीकों के छींटे
ये बेबाक़ नज़रें ये गुस्ताख़ फ़िक़रे
ये ढलके बदन और ये मदक़ूक़ चेहरे
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


ये भूखी निगाहें हसीनों की जानिब
ये बढ़ते हुए हाथ सीनों की जानिब
लपकते हुए पांव ज़ीनों की जानिब
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


यहां पीर भी आ चुके हैं जवां भी
तनूमंद बेटे भी अब्बा मियां भी
ये बीवी भी है और बहन भी है मां भी
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी
यशोदा की हमजिंस राधा की बेटी
पयंबर की उम्मत ज़ुलेख़ा की बेटी
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं|


ज़रा मुल्क़ के रहबरों को बुलाओ
ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ को लाओ
सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं| 


साहिर 




इसी "सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं| " को बदल कर साहिर ने प्यासा के लिए "जिन्हें नाज है हिंद पर वो कहा है ।" ये गाना दिया... इसी नज़्म का के सी कांडा जी ने अंग्रेजी में अनुवाद किया वो ऐसे....

Brothels .....



These lanes, these marts of rich delights,
Precious lives, undone, defiled;
Where are the defenders of virtuous pride?
Where are they who praise, the pious eastern ways?
These sinuous streets, these doors ajar,
The clinking coins, the moving masks,
Deals of honour, hagglings fast,
Where are they who praise, the pious eastern ways?
These dimly-lighted, stinking streets,
These yellowing buds, crushed and ceased,
These hollow charms, for sale and lease;
Where are they who praise, the pious eastern ways?
The jingling trinklets at casement bright,
Tambourins athrob’ mid gasping life;
Cheerless rooms with cough alive;
Where are they who praise, the pious eastern ways?
Boisterous laughs on public paths,
Crowds at windows, thick and fast,
Vulgar words, obscene remarks;
Where are they who praise, the pious eastern ways?
The betel spittal, the floral wreaths,
Audacious looks and filthy speech,
Flaccid figures, looks diseased;
Where are they who praise, the pious eastern ways?
Lecherous eyes in beauty’s quest,
Extended hands chasing breasts,
Springing feet on stairs pressed;
Where are they who praise, the pious eastern ways?
This is the haven of young and old.
Aging sires and youngsters bold,
Wife, mother and sister — she plays a triple role.
Where are they who praise, the pious eastern ways?
Help, O Help, this daughter of Eve!
Radha’s child, Yashoda’s breed;
The prophet’s race, Zuleikha’s seed;
Where are they who praise, the pious eastern ways?
Call, O call the leaders wise
Let them see these streets, these sights,
Where are the champs of eastern pride?
Where are they who praise, the pious eastern ways?

इसका अगर किसी और भाषा में भी अनुवाद हो तो कृपया जानकारी दे...

..अवंती

एक कविता बन रही है

मेरी ही एक कविता से शुरुवात   कर रही हूँ ..



एक कविता बन रही है 
पुराने किले में एक कोने में रहेनेवाली बुढ़िया बना रही है एक कविता 
टूटे -फूटे बरतन लेकर मिट्टी के ढेर पर बैठकर एक बुढ़िया 
अपने बदन पे एकलौती शॅाल लेकर....वोही शॅाल जो तुमने दी थी उसे,  
अपना फूटा नसीब लेकर हंसकर वो बुढ़िया बना रही है एक कविता ..............

एक कविता बन रही है 
सड़क पर ट्राफिक में खड़े रहकर एक लड़की फूल बेचनेवाली 
फूलसी नाजुक , कलीसी कच्ची बच्ची ... गजरे बनती हुई बच्ची .. 
वोही बच्ची तुमने पूरी टोकरी फूल खरीद लिए थे जिससे, 
फूल बेचते बेचते  बच्ची अपने नसीब के कांटे सेहते बना रही है एक कविता ...........

एक कविता बन रही है 
स्टेशन पर आधी रात को चाय बेचनेवाला ...  बारिश में भीगता हुवा आदमी 
आधी रात को जिसे तुमने बाल्कनी से देखकर अपना छाता दिया था वो चायवाला 
चाय बनाते बनाते अपने नसीब के साथ बना रहा है एक कविता..............

एक कविता बन रही है 
बिखरे हुए लम्हे लेकर ; बिछड़ी हुई यादें लेकर 
टूटे फूटे नगमे खोजकर उन्हें फिरसे जुटाने की कोशिश में रहनेवाली मै... बना रही हूँ एक कविता ......


एक ऐसी कविता जिसमे ना परी हो  .. ना चंदा हो  ... 
एक ऐसी कविता जिसमे ना प्यार हो  .. ना गीत हो  ...
एक ऐसी  कविता जो कभी ना ख़तम हो .. 
एक ऐसी  कविता जिसका कोई आकार ना हो ....
एक ऐसी कविता जो बेहेती जाए बेहेती ही जाए नदी की तरह... 
और आकर मिल जाए तुम्हारी नज्मोसे 
एक ऐसी कविता बन रही है..............
-------------------------------------------------------------------------------------------------------- अवंती